लंड मांगे चूत की झलक

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Lund maange chut ki jhalak पापा मुझे कहने लगे कि बेटा जब घर आओ तो मुझे फोन करना मैंने पापा से कहा मुझे घर आने में समय लग जाएगा वह कहने लगे तुम्हें घर आने में कितना समय लगेगा। मैंने पापा से कहा पापा अभी तो ऑफिस में काम है मैं जैसे ही फ्री हो जाऊंगा तो आपको कॉल कर दूंगा वह कहने लगे ठीक है बेटा जब तुम घर आओ तो मुझे फोन करना। मैंने पापा से कहा वैसे आप मुझे बता दीजिए क्या कोई जरूरी काम था वह मुझे कहने लगे कि मेडिकल स्टोर से मेरी कुछ दवाइयां ले आना। मैंने पापा से कहा ठीक है मैं आते वक्त दवाइयां ले आऊंगा, मैंने पापा से कहा अभी मैं फोन रखता हूं तो पापा कहने लगे ठीक है बेटा मैं तुम्हें दवाइयों के नाम मैसेज करता हूं और पिताजी ने मुझे दवाइयों के नाम मैसेज कर दिए। मैं भी अपने काम में व्यस्त था जब मैं फ्री हुआ तो मै देखने लगा पापा ने मुझे कौन सी दवाइयां भेजी हैं। मैं जब ऑफिस से फ्री हुआ तो शाम के वक्त मैं घर के लिए निकल रहा था तभी मेरे दोस्त ने मुझे कहा कि गौरव क्या तुम मुझे रास्ते में छोड़ दोगे।

मैंने उसे कहा क्या तुम आज अपनी मोटरसाइकिल नहीं लाए हो वह मुझे कहने लगा नहीं यार आज मेरी मोटरसाइकिल में कोई परेशानी हो गई थी इस वजह से मैंने उसे मैकेनिक के यहां खड़ी करवा दी थी और सोच रहा हूं कि तुम यदि मुझे वहां छोड़ दोगे तो मैं चला जाऊंगा। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें वहां तक छोड़ देता हूं वह मेरे साथ बैठ चुका था और मैं उसे लेकर चल पड़ा। हम दोनों रास्ते में बातें करते रहे तभी रास्ते में कुछ पुलिस वाले खड़े थे उन्होंने हमें रोक लिया जब उन्होंने हमें रोका तो एक पुलिस वाला मेरे पास आया और कहने लगा अपनी गाड़ी के पेपर दिखाओ। उसकी आवाज और उसके बात करने के तरीके से मुझे लग रहा था कि आज वह मुझसे पैसे निकलवाकर ही रहेगा मैंने उसे अपने गाड़ी के पेपर दिखाये तो वह उसमें ना जाने क्या-क्या कमियां निकालने लगा। मैंने उसे कहा सर अब हमें जाने दीजिए मुझे जल्दी घर जाना है मुझे अपने पापा के लिए दवाई लेकर जाना है वह तो चाहता था कि मैं उसे कुछ पैसे दे दूं लेकिन उसकी जेब मैं गर्म करना नहीं चाहता था और वह आसानी से मुझे छोड़ने वाला भी नहीं था। वह मुझसे कहने लगा कि देखो तुम्हारे पास तो पूरे कागज हैं ही नही मैं तुम्हें कैसे छोड़ सकता हूं मैंने अपनी जेब से 500 निकालते हुए उसके हाथ में रखे तो उसने वह अपनी जेब में रख लिया और मैं वहां से आगे निकल पड़ा।

मेरा दोस्त कहने लगा तुमने उसे इतने पैसे क्यों दिए मैंने उसे कहा यार मुझे घर जल्दी आना है और तुम्हें तो मालूम है कि कौन इस वक्त उसके मुंह लगता कोई फायदा तो होने वाला नहीं था। वह कहने लगा हां तुम कह तो ठीक रहे हो वह मुझे कहने लगा मुझे तुम यहीं पर उतार देना मैंने उसे आधे रास्ते में छोड़ दिया और वहां से मैं घर के लिए निकला तो मुझे ध्यान आया कि मुझे पापा के लिए दवाई भी लेनी थी। मैंने एक मेडिकल स्टोर में गाड़ी को रोकी और वहां मैंने उस मेडिकल स्टोर वाले को पूछा की आपके पास यह दवाई मिल जाएगी। वह कहने लगा नहीं मेरे पास तो यह दवाई नहीं है मैंने दूसरे मेडिकल स्टोर में पता किया तो मुझे वह दवाई मिल चुकी थी मैं जब घर पहुंचा तो पापा कहने लगे गौरव बेटा मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था क्या तुम मेरे ही दवाई लेकर आ चुके हो। मैंने पापा से कहा पापा मैं आपकी दवाई लेकर आ चुका हूं वह मुझे कहने लगे कि ठीक है बेटा मैं तो सोच रहा था कहीं तुम्हारे दिमाग से उतर ना जाए। मैंने पापा से कहा पापा मेरे दिमाग से उतर गई थी लेकिन मुझे ध्यान आ गया कि दवाई लेकर आनी है, मैने पापा को दवाई दी और मैं अपने रूम में चला गया। जब मैंने कपड़े चेंज किए तो मैं बाहर आ गया और पापा मुझसे कहने लगे बेटा तुम कितने दिन की दवाई लाये हो मैंने पापा से कहा पापा यह 15 दिन की दवाई है। पापा कहने लगे चलो तुमने ठीक ही किया जो दवाई ले आये वैसे तुम मुझे 10 दिन की ही दवाई चाहिए लेकिन चलो कोई बात नहीं तुम 15 दिन की दवाई ले आए तो। मेरी मम्मी ने मेरे लिए चाय बनाई और मुझे चाय देते हुए कहा गौरव बेटा हम लोग सोच रहे थे कि तुम्हारे मामा की लड़की की शादी में चले जाएं तो क्या तुम अपने लिए खाना बना दोगे।

मैंने मां से कहा मां वैसे भी मैं अकेला ही हूं और मेरा मन करेगा तो मैं बना लूंगा नहीं तो बाहर से खा कर आ जाऊंगा मम्मी कहने लगी हम लोग एक हफ्ते में लौट आएंगे। मैंने मम्मी से कहा ठीक है मम्मी आप लोग चले जाइए और फिर मम्मी पापा ने अपना सामान पैक करना शुरु कर दिया। पापा कहने लगे कि बेटा तुम हमारे लिए रिजर्वेशन करवा दोगे मैंने पापा से कहा पापा मैंने पापा का रिजर्वेशन करवा दिया है। उन लोगों को छोड़ने के लिए मैं रेलवे स्टेशन तक भी गया मैंने उन्हें ट्रेन में बैठा दिया था और जब वह लोग ट्रेन में बैठ गए तो वह मुझे कहने लगे तुम अपना ध्यान रखना। मैं भी अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था जब मैं ऑफिस पहुंचा तो वहां पर पहुंचते ही मैंने अपना काम शुरू कर दिया मुझे ऑफिस पहुंचने में 10 मिनट लेट हो चुकी थी। लंच टाइम में मेरा दोस्त बैठ कर खाना खा रहा था वह कहने लगा कि आओ तुम भी खाना खा लो। मैंने उसे कहा नहीं यार तुम खा लो मेरा मन नहीं है लेकिन हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और उसके बाद जब हम लोगो ने खाना खाया तो हम लोग अपने काम पर लौट आए और काम करने लगे शाम के वक्त मैं समय पर घर निकल गया था।

जब मैं घर लौटा तो मैं सोचने लगा अभी मेरे पास समय है मैं खाना बना लेता हूं मैंने खुद ही खाने की तैयारी शुरू कर दी और खाना बनाने लगा। मैंने अपने लिए खाना बना दिया था और खाना बनाने में मुझे समय तो लग गया था लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि खाना इतना अच्छा बन जाएगा। मैं खाना खाकर छत पर टहलने लगा मैं छत पर टहल रहा था तभी पड़ोस में रहने वाले अंकल ने मुझसे कहा कि बेटा क्या तुम्हारे मम्मी-पापा शादी में गए हुए हैं। मैंने उनसे कहा हां वह लोग शादी में गए हुए हैं वह कहने लगे कि वह कब लौटेंगे मैंने उन्हें कहा एक हफ्ता तो लग ही जाएगा एक हफ्ते बाद ही उनका लौटना होगा। वह कहने लगे चलो कोई बात नहीं, उन्होंने कहा कि बेटा यदि खाने की कोई परेशानी हो तो तुम हमारे घर पर आ जाना। उनका हमारे साथ बड़ा ही अच्छा संबंध है और वह अक्सर हमारे घर पर आते हैं। मेरी उनसे बातचीत नहीं है परंतु पापा मम्मी के साथ उनकी बड़ी अच्छी बातचीत है इसलिए वह मुझसे पूछ रहे थे, मैंने उन्हें मना कर दिया था और कहा कि नही मैं अपने लिए खाना बना लूंगा। मैं घर पर ही था और अपने ऑफिस से जब मैं घर लौटता तो उस वक्त मैं अपने लिए खाना बना दिया करता और हर रोज की तरह ही यह सिलसिला जारी रहा। मम्मी पापा को आने में अभी समय बाकी था वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुम अपना ध्यान तो रख रहे हो मैंने अपनी मम्मी से कहा हां मम्मी मैं अपना ध्यान रख रहा हूं आप बिल्कुल भी चिंता ना करें। मैंने एक दिन हमारे पड़ोस में रहने वाली भाभी जोकि मुझ पर बड़े डोरे डाला करती थी वह अक्सर मुझे देखा करती थी और मैं भी उन्हें देखकर खुश रहता। मैंने सोचा क्यों ना उनसे मिला जाए मैं उनसे मिलने के लिए चला गया। यह इत्तेफाक ही था कि उस दिन उनके पति भी घर पर नहीं थे और उसका फायदा मुझे मिला। संजना भाभी मुझे कहने लगी गौरव आज आप काफी दिनों बाद आ रहे हैं। मैंने उन्हें बताया हां भाभी जी टाइम ही नहीं मिल पाता है और आज आपसे मिलने का मन हुआ तो आपसे मिलने चला आया।

संजना भाभी भी मेरे लिए पागल थी और वह मुझे कहने लगी आइए ना आप इतनी दूर क्यों बैठे हैं मेरे पास आकर बैठ जाइए। मैंने भी उनकी जांघ पर अपने हाथ को रखा और जैसे ही मैंने अपने हाथ को उनके जांघ पर रखा तो मैं अपने हाथ से उनकी जांघ को सहलाने लगा। जब मैंने उनकी योनि की तरफ अपने हाथ को बढ़ाया तो वह मचलने लगी मैंने भी अपने लंड को बाहर निकालते हुए हिलाना शुरू किया तो संजना भाभी ने अपने मुंह के अंदर लंड को ले लिया वह मेरे लंड को चूसने लगी उन्हें बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी अच्छा लग रहा था। उन्होंने जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मुझे बहुत अच्छा लगा और काफी देर तक उन्होंने मेरे लंड का रसपान किया। जब मैंने अपने लंड को संजना भाभी की गीली हो चुकी योनि के अंदर घुसाया वह चिल्लाने लगी।

मेरा लंड पूरा अंदर तक जा चुका था मै बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था और जिस तेजी से मैंने उन्हे चोदा उन्हें भी बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। मैंने भाभी से कहा भाभी मजा आ रहा है और भाभी के दोनों पैरों को मैंने चौड़ा करते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मेरा लंड भाभी की योनि के अंदर बाहर हो रहा था उन्हें भी बड़ा मजा आ रहा था मुझे भी बड़ा आनंद आता काफी देर तक मैं ऐसा ही करता रहा। जब भाभी की चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकल आया तो वह कहने लगी अपने माल को गिरा दो अब मुझसे रहा नहीं जाएगा। मैंने उन्हें कहा अच्छा तो आप झडने वाली है वह कहने लगी हां उसी के साथ मैंने भी अपने वीर्य को उनकी योनि में गिरा दिया लेकिन उनकी योनि के अंदर से अब भी मेरा वीर्य टपक रहा था। जैसे ही मैंने अपने मोटे लंड को उनकी योनि के अंदर घुसाया तो वह उत्तेजित होने लगी और उनकी योनि से दोबारा मेरा पानी निकलने लगा था मैं उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और मुझे भी आनंद आ रहा था। काफी देर तक में उन्हे ऐसे ही धक्के मारता रहा उनकी योनि कि गर्मी बढने लगी लेकिन मैं ज्यादा समय तक उनकी योनि के मजा ना ले सका और मेरा वीर्य दोबारा से भाभी की चूत मे गिरा और उसके बाद मैं अपने घर लौट आया।


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