एक तुम और एक मैं

Ek tum aur ek mai:

Antarvasna, hindi sex stories एक वक्त ऐसा भी था जब गांव में मेरे चाचा के बच्चे और मैं काफी शरारत किया करते थे हम लोगों का बचपन बड़ा ही अच्छा गुजरा लेकिन धीरे-धीरे समय बदलता चला गया हम लोग गांव से शहर आ गए। गांव के तौर-तरीके अब शहर में कहां चलने वाले थे इसलिए हम लोगों ने भी शहर के तौर तरीके सीख लिए थे और हम पूरी तरीके से शहर के हो चुके थे गांव से हमारा कोई लेना-देना ना था। मैं जब पहली बार चंडीगढ़ में आई थी तब मैं बहुत शर्माती थी लेकिन धीरे-धीरे मेरी शर्म भी अब गायब हो चुकी थी मैं शहर के तौर-तरीके में ढल चुकी थी। पहले मैं गांव में साधारण सा सूट पहनती थी परंतु अब शहर में मैं जींस और ना जाने कितनी नई तरह की ड्रेस आती थी वह सब मैं पहनने लगी थी। मुझे तो ऐसा लगा जैसे कि हमारे जीवन में कोई चमत्कार हो गया और सब कुछ बड़ी जल्दी ही बदल गया मैंने कभी भी सोचा ना था कि इतनी जल्दी सब कुछ बदल जाएगा।

मैं एक दिन इस बारे में अपनी मां से बात कर रही थी मेरी मां कहने लगी बेटा हम लोग जब गांव में रहते थे तो कितना प्यार प्रेम था लेकिन शहर में तो पड़ोसी पड़ोसी को पहचानने को तैयार नहीं है। हम लोग सिर्फ अपने घर के चारदीवारी में ही कैद होकर रह गए थे और मशीनी जीवन ने हम पर अपना पूरा कब्जा कर लिया था हम लोग पूरी तरीके से मशीनों पर निर्भर हो चुके थे। मेरी निर्भरता भी अब मशीनी उपकरणों पर हो चुकी थी जब पहली बार मैंने मोबाइल अपने हाथ में लिया था तो मुझे ऐसा लगा कि ना जाने क्या नई चीज हमारे हाथ में आ गई हो मैं अच्छे से मोबाइल का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रही थी। मेरी मौसी के लड़के जो कि बचपन से ही चंडीगढ़ में रहे उन्होंने मुझे मोबाइल का इस्तेमाल करना सिखाया। समय बड़ी तेज गति से चल रहा था और सब कुछ अब पूरी तरीके से बदलने लगा था चंडीगढ़ भी अब पहले जैसा नहीं रह गया था इतनी जल्दी सब कुछ बदलता चला गया कि अब एक दूसरे से जैसे कोई मतलब ही नहीं रह गया था।

मेरी शादी भी हो चुकी थी और शादी को हुए करीब 9 साल हो चुके हैं लेकिन अब मेरे पति और मेरे बीच में पहले जैसा प्यार ना था हम लोग एक ही घर में होते हुए भी एक दूसरे की तरफ देखते तक नहीं थे। मेरे पति तो मुझे कभी समय ही नहीं दे पाते थे वह जब भी घर आते तो हमेशा अपने मोबाइल से लगे रहते थे उनके आसपास जैसे मोबाइल का एक जाल बिछा हुआ था और वह उससे बाहर ही नहीं आ पा रहे थे। मैं तो अपने घर के काम में ही ज्यादातर बिजी रहती थी क्योंकि मैंने फैसला किया कि मैं अब घर का ही काम करूंगी मैंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था मैं अब घर पर ही ज्यादातर समय बिताया करती थी। मुझे घर पर ऐसा लगता है कि जैसे घर मुझे काटने को दौड़ रहा है इसलिए मैंने अब अपनी जिंदगी में थोड़ा परिवर्तन लाने की कोशिश की और अपनी जिंदगी को मैं अब बदलने लगी। मैंने सुबह के वक्त मॉर्निंग वॉक पर जाना शुरू कर दिया था सुबह के वक्त मेरी मुलाकात एक अंकल से हर रोज हुआ करती थी वह अंकल दिखने में अच्छे घर के थे वह हर रोज अकेले ही आते थे। मैं जब भी पार्क में जाती तो मैं उन्हें देखती थी आखिरकार एक दिन मैंने उन अंकल से बात की और मैंने उन्हें बताया कि मेरा नाम काजल है। अंकल ने मुझे कहा मेरा नाम सुरेश है मैं विद्युत विभाग में जॉब करता था लेकिन अभी 6 महीने पहले ही मैं रिटायर हुआ हूं मैंने अंकल से कहा चलिए यह तो बड़ी खुशी की बात है। मुझे अंकल को देखकर भी हमेशा ऐसा लगता कि जैसे वह अकेले हैं और उनके जीवन में भी काफी अकेलापन है क्योंकि उनके अकेले होने का कारण सिर्फ और सिर्फ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी थी। धीरे-धीरे अंकल से जैसे मेरी दोस्ती सी होने लगी थी हम दोनों की उम्र में काफी फर्क था लेकिन उसके बावजूद भी मुझे अंकल के साथ में बैठना अच्छा लगता है। सुरेश अंकल मुझसे अपनी पुरानी यादों को साझा किया करते उनकी पत्नी की मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी थी और वह अकेले ही थे।

मैंने एक दिन सुरेश अंकल से पूछा आप सारा दिन अपने घर पर क्या करते हैं तो अंकल कहने लगे मैं घर के चारदीवारी में कैद रहता हूं ना ही मेरे बच्चे मुझसे बात करते हैं और ना ही मेरे नाती पोते मुझसे बात करते हैं। मुझे कभी अकेलापन सा महसूस होता है और जब से मशीनीकरण हुआ है तब से सब लोग एक दूसरे से दूर जा चुके हैं और घर में कोई बात करने तक को तैयार नहीं है इसलिए मैं घर में बैठकर सिर्फ टीवी देखता रहता हूं और मेरे पास उसके अलावा कोई चारा नहीं है। मैंने अंकल से कहा क्या आपके दोस्तों से आपकी मुलाकात नहीं होती वह कहने लगे मेरे दोस्तों से मेरी मुलाकात तो होती रहती है लेकिन हम सब लोग अपने जीवन में बिजी हो चुके हैं इसलिए किसी के पास अब समय नहीं है। मेरे कुछ दोस्त फॉरेन में सेटल हो चुके हैं इसलिए मैं अकेला ही हर रोज पार्क में आ जाया करता हूं ताकि मेरा टाइम कट सकें। सब कुछ इतनी तेजी से चल रहा था कि मुझे कुछ एहसास की नहीं हुआ कि समय कब निकलता चला गया लेकिन अंकल से हर रोज मेरी मुलाकात होती थी और एक दिन अंकल ने मुझे कहा कि तुम मेरे घर पर आना। मैंने सोचा कि चलो एक दिन अंकल से मिलने उनके घर पर ही चलते हैं मैं जब अंकल से मिलने के लिए उनके घर पर गई तो मैंने उनका आलीशान बंगला देखा जो कि मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि अंकल का घर इतना बड़ा होगा।

मैं जब अंकल के पास गई तो अंकल कहने लगे अरे काजल तुम कब आई मैंने उन्हें कहा बस अभी कुछ देर पहले आई आपके घर का पता मुझे एक बच्ची ने बताया मुझे आपके घर का एड्रेस ही नहीं मिल पा रहा था। अंकल मुझसे कहने लगे चलो तुमने बहुत अच्छा किया जो मुझसे मिलने के लिए आ गई, अंकल और मैं बैठ कर बात कर रहे थे तभी उनकी बहू भी आ गई। अंकल ने मेरा परिचय अपनी बहुओं से करवाया और उन लोगों ने भी मेरे साथ सिर्फ एक औपचारिकता के तौर पर मुलाकात की उसके बाद वह अपने रूम में चली गई उन्हें अंकल से कोई लेना देना नहीं था। मैंने जब सुरेश अंकल से कहा कि मैं अब चलती हूं वह कहने लगे तुम थोड़ी देर बाद चले जाना लेकिन मुझे उस दिन कहीं जाना था इसलिए मैं ज्यादा देर अंकल के पास ना रुक सकी और मैं अपने घर वापस लौट आई। मैं जब सुरेश अंकल के बारे में सोच रही थी तो मुझे लगा की अंकल कितने अकेले हैं उनकी बहू और उनके बच्चे घर पर होते हुए भी उनसे बात नहीं करते और ना ही उनके साथ वह समय बिताया करते हैं। मै सुरेश अंकल से जब भी मिलती तो मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन उनका अकेलेपन देख कर मुझे काफी तकलीफ होती थी। मैंने इस बार मे सुरेश अंकल से बात की आपके पास तो पैसे की कोई कमी नहीं है। वह कहने लगे पैसे की कमी नहीं है लेकिन मेरे पास प्यार भी तो नहीं है उनकी बात सुनकर मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहां मैं आपके साथ हूं और आपका साथ हमेशा दूंगी। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैंने यह बात उन्हें क्यों कही लेकिन मेरे मुंह से यह बात निकल चुकी थी जिसके कारण मैंने अब सुरेश अंकल का साथ देने का फैसला कर लिया था। एक दिन उनके बहू और बेटे सब लोग घूमने के लिए गए हुए थे उसी दौरान में सुरेश अंकल के पास चली गई। मेरे जीवन में भी अकेलापन था मुझे अपने पति से वह सब नहीं मिल पा रहा था इसलिए मैं सुरेश अंकल के पास गई।

जब मैं उनके पास गई तो हम दोनों ने पहले तो काफी देर तक एक-दूसरे से बातें की लेकिन उसके बाद जब अंकल ने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मैं समझ गई मेरी इच्छा अंकल पूरा कर सकते हैं। उन्होंने भी अपने मोटे से लंड को बाहर निकाला और मुझे कहा मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसो तुम्हे बहुत अच्छा लगेगा। मैंने सुरेश अंकल के मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया जिससे कि मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने उनके लंड को चूस कर खड़ा कर दिया था वह पूरी उत्तेजना में आ चुके थे जैसे ही मैंने अपनी योनि के अंदर उंगली डाली तो वह कहने लगे रुको मैं तुम्हारी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाता हूं। मैं उनके सामने नंगी पडी थी उन्होंने जब अपने मोटे लंड को धीरे धीरे मेरी योनि में घुसाया तो उनका कड़क और मोटा लंड मेरी योनि में प्रवेश हो चुका था जिसके कारण मेरी योनि में हलचल पैदा होने लगी। मेरी योनि से पानी बाहर की तरफ को निकालने लगा मुझे बहुत आनंद आ रहा था और काफी देर तक अंकल मुझे ऐसे ही धक्के देते रहे।

मैंने उन्हें कहा मुझे कुछ नया करना है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुमने कभी अपने पति के साथ एनल सेक्स किया है? मैंने उन्हें कहा वह तो मेरी तरफ देखते ही नहीं है मेरे लिए तो जैसे उनकी जिंदगी में कोई जगह ही नहीं है मैं सिर्फ उनके लिए एक नौकरानी मात्र से बढ़कर नहीं हूं। सुरेश अंकल मुझसे पूरी तरीके से सहमत थे। वह कहने लगे मेरे भी जीवन में बहुत अकेलापन है मेरे पास भी कोई नहीं है यह कहते हुए उन्होंने अपने लंड पर तेल की मालिश की उन्होंने अपने लंड पर एक चिपचिपा सा तेल लगाया। जैसे ही उन्होंने मेरी गांड को थोड़ा सा ऊपर करते हुए मेरी गांड के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्ला उठी। मेरे मुंह से बड़ी तेज चीख निकलने लगी उसी के साथ उनका लंड मेरी गांड में प्रवेश हो चुका था। वह अब तेज गति से मुझे धक्के दिए जा रहे थे मेरा यह पहला अनुभव था लेकिन सुरेश अंकल ने मेरी गांड में मे काफी तेज धक्के दिए। जब वह मुझे धक्के देते तो मुझे ऐसा लगता जैसे कि मेरे शरीर में भूकंप सा पैदा हो रहा है और मैं पूरी हिल जाती। सुरेश अंकल के अंदर अब भी वही ताकत थी उन्होंने जब अपने वीर्य की बूंदों को मेरी चूतड़ों पर गिराया तो मुझे बहुत अच्छा लगा।


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